बुधवार, 1 जून 2011

हास्य कविता

मेरा हास्य कवि बनना एक हादसा था
बस में एक मैडम जी से पड़ गया वास्ता था
बात उन दिनों कि है जब मैं कवांरा
लोगों की नजर में मैं एक आवांरा था
लेकिन मुझे तो लैला मजनू के प्यार की खोज थी
गलि से लेकर बस स्टैंड में रोज थी
ऐसे में एक दिन एक मैंडम जी मुझसे बस में टकरायीं
मेरे रोम- रोम में करेंट समायी
और मन में विचार कौंधा कि
मेरा थोबड़ा उन्हें भा गया है क्या भाई
फिर मैंने उनपर थोड़ी सी और नजर गड़ायी
अबकी बार वे थोड़ी सी षरमायी
लड़की हंसी तो पटीवाली बात मुझे याद आयी
फिर मोबाइल पर वे कुछ अंग्रेजी में गिटपिटाईं
जो बात मेरे भेजे में नहीं समायी
फिर मुसटंडो की जमात आयी
जी भर के उन सबों ने मेरी की पिटायी
और मुंह पर कालीख पोतकर
गदहा पर मेरी बारात निकलवायी
और गदहे को गदहा पर देखकर
गदहों ने जी भर कर ताली बजायी
इस प्रकार मैं हास्य कवि बन गया मेरे भाई।



हास्य व्यंग्य के सप्तरंगी रंग

दिल्ली में मिला बम - दिल्ली तो है दिलवालों की फिर काहें का गम।
मंत्री के आवास में चोरों ने हाथ साफ किया- चोर भी समझते हैं कि माल कहां भरा है।

हां या ना का रिमोट कंट्रोल खिलाडियों के हाथ होनी चाहिए- कपिल देव- फिर कांहेको खिलाडि़यों को मैच फिक्सिंग से रोका जा रहा है।

देष या क्लब क्रिकेटरों का चूनने दो- हां भाई जमाने का ख्याल रखो।
नोयडा में किसानों को कांग्रेस ने उकसाया- मायावती- और हमने तो सिर्फ गोली चलवाया।

पाॅप स्टार लेडी गागा हुई दिवालिया- वो भी अमेरिकी बैंकों की तरह बिना समझे लोन बांट रहीं थी क्या?

पाकिस्तानी पत्रकारों को हथियार रखने की छूटः रहमान मलिक- हां हमारा इरादा पाकिस्तान में हथियार रखने की छूट प्रत्येक नागरिक को देना है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आवारगी की तो पूछिए ही मत.....कुवारे होने पे सब ऐसे ओछी नजरो से देखते है की न जाने क्या कर दिया ...अपने ही मोहल्ले मैं बड़ी शर्मिंदगी से दाखिल होते हैं.....

    बहुत बढ़िया कविता कही आपने...क्या बात है....

    सप्त रंगी रंगों ने भी सराबोर कर दिया.....अनेक शुभ कामनाये

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