सोमवार, 7 मई 2012

मै सोलह श्रृंगार कर ली


क्रीम पोतकर मै  सोलह श्रृंगार कर ली 
 काजल लगाकर मै  उनको प्यार कर ली 
मुझे देखकर  उनके प्राण पखेरू उड़ गए 
तब उनकी अंतरात्मा की शांति के लिए
मैने  हनुमान चालीसा की पाठ  कर दी        

10 टिप्‍पणियां:

  1. अंतिम पंक्तियों ने जबरदस्त प्रभाव छोड़ा |
    आभार ||

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  2. तब उनकी अंतरात्मा की शांति के लिए
    मैने हनुमान चालीसा की पाठ कर दी,...

    वाह...वाह ..क्या बात कही .....

    RECENT POST....काव्यान्जलि ...: कभी कभी.....

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  3. वाह क्या बात है!! आपने बहुत उम्दा लिखा है...बधाई
    इसे भी देखने की जेहमत उठाएं शायद पसन्द आये-
    फिर सर तलाशते हैं वो

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