गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

कामनी और कंचन को हाथ नहीं लगाता हूँ

भटके हुए प्राणियों को रास्ता दिखाता हूँ 

कामनी और कंचन को हाथ नहीं  लगाता हूँ 

भक्तों को माया से दूर रखने के लिए 

उनकी गाढ़ी कमाई को मुफ्त में उड़ाता हूँ  

2 टिप्‍पणियां:

  1. जय हो निर्मल बाबा की ....
    वाह!!!!बहुत सुंदर प्रस्तुति,..

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: गजल.....

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति |
    शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ||

    सादर

    charchamanch.blogspot.com

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