सोमवार, 21 नवंबर 2011

नीतीश भयग्रस्त हैं

खबर है कि सुषासन बाबू भयग्रस्त हैं। और इस कारण वे अति व्यस्त हैं।  धड़ाधड़ विकास कार्यो में तल्लीन हैं। उनके व्यस्तता से लगता है चुनाव उत्तर प्रदेष में न होकर बिहार में हो रहा है। इतना तो बहन मायावती भी नहीं व्यस्त हैं, जिनके राज्य में चुनाव होने जा रहा है। उनके विरोधियों का कहना है कि अगर वह भयग्रस्त नहीं होते तो पटना में बैठकर सत्तासुख भोगते, राज्य में घूम-घूमकर उपद्रव नहीं करते। हालांकि बहन मायावती भी व्यस्त हैं । लेकिन वे दूसरी तरह से व्यस्त हैं। वे पार्कों एवं मुर्तियों के उद्घाटन एवं निर्माण में व्यस्त हैं। मंत्रियों का क्लास लेने में व्यस्त हैं। नीतीष कुमार को लग रहा है कि वे अभी से व्यस्त नहीं रहेंगे तो लालू अतिव्यस्त होकर कहीं जनता का कान न भर  देेें। फिर तख्तापलट में देर नहीं लगेगी, कारण कि जनता विकास कार्य को भूल जाती है। जाति को याद रखती है। लेकिन नीतीष के व्यस्त होने से राज्य के अधिकार एवं बाबू त्रस्त हैं। कारण कि वे अपनी वीवीयों के यहां टाइम से हाजिरी नहीं दे पा रहे हैं। आधिकारियों को वीवीयों और नीतीष दोनों की डाॅट सहनी पड़ रही है।  नीतीषजी अधिकारियों को उपदेष पिलाने में व्यस्त हैं तो अधिकारी बाबूओं को हड़काने में व्यस्त हैं। नीतीष व्यस्तता में थोक के भाव में आदेष दे रहें ,जिसको वे देर राततक पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वे षेड्ढ कार्यों को सपनों में निपटा रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि जिस राज्य में व्यक्ति को सपनों में भी स्वतंत्रता प्राप्त न हो, उसे तानाषाही कहना ठीक होगा, सुषासन नहीं।
यह भी कहा जा रहा है कि  लालू का भूत अभी नीतीष का पीछा नहीं छोड़ रहा है। विक्कीलीक्स के खुलासे के अनुसार मुख्यमंत्री रात में सोते वक्त बार-बार जाग जाते हैं। कारण कि वे स्वप्न में लालू यादव को अपनी कुर्सी पर बैठा पाते हैं।
एक दुसरी खबर के अनुसार वे जब कभी फुर्सत में रहते हैं। तो दूसरे लोक में गमन करने लगते हैंैं और लालू यादव के मुख्यमंत्री के कुर्सी पर बैठे रहने के बारे में मनन करने लगते हैं, और उसके बाद उनके मुंह से बरबस निकल पड़ता है, कभी कुर्सीं छूट गई तो हम जीकर क्या करेंगे।
बस इसी गम को भुलाने के लिए राज्य का ताबड़तोड़ दौरा कर रहे हैं।
ऐसा नहीं केवल नीतीष व्यस्त हैं। नरेंद्र मोदी भी व्यस्त हैं। सूत्रों के अनुसार मोदी व्यस्त हैं इसलिए नीतीष भी व्यस्त हैं। हालांकि कुछ लोगों का इसके उल्टा भी कहना है।
एक अन्य खबर के अनुसार नीतीष कुमार नरेंद्र मोदी के चुनौती को स्वीकार करके व्यस्त हैं न कि लालू यादव के कारण व्यस्त हैं। नरेंद्र मोदी को अंगया देकर बीजे गायब करने के बाद मोदी ने  नीतीष को गुजरात की तरह विकास करके दिखाओ की चुनौती दी थी, जिसे नीतीष ने सहड्र्ढ स्वीकार लिया था और उसी समय से व्यस्त हो गये थे। लेकिन बीजेपी नेताओं ने मोदी को खूब कोसा था कि उनके कारण, वे नीतीष के ब्रम्हभोज से वंचित रह गए।
सूत्रों के अनुसार अमेरिकी प्रषासन द्वारा मोदी की तारीफ से और टाइम मैगजीन द्वारा नीतीष की तारीफ से दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा चरम पर पहुुंच गयी है।


प्रसिद्ध राजनीतिक विष्लेड्ढक लालू यादव का कहना है कि अगर नीतीष इसी तरह अधिकारियों को व्यस्त रखे तो राज्य को सौ साल पीछे जाने से कोई नहीं रोक पाएगा। उनका कहना है कि अधिकारी दबाव में जी रहे हैं। उनका कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। वे कार्य स्थल पर हीं सो जा रहे हैं।

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