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सोमवार, 7 मई 2012

मै सोलह श्रृंगार कर ली


क्रीम पोतकर मै  सोलह श्रृंगार कर ली 
 काजल लगाकर मै  उनको प्यार कर ली 
मुझे देखकर  उनके प्राण पखेरू उड़ गए 
तब उनकी अंतरात्मा की शांति के लिए
मैने  हनुमान चालीसा की पाठ  कर दी        

शनिवार, 5 मई 2012

जय हो निर्मल बाबा की

तंत्र चले ना  मंत्र 
ना  रहे दुखों का घेरा 
भाग्य उदय  हो जायेगा 
बस नोटों का बंडल तू देता ज़ा  चेला 


शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

बन गया भगवान मै अपने भक्तों का देखकर दुःख

बन गया भगवान मै अपने  भक्तों का देखकर दुःख 
आचार  एवं विचार में असमानता की
  मेरे भक्तों को अब रहेगी छूट 
घूम- घूमकर बोलो तुम सारे जग में झूठ 
भक्त बनने मेरा तुम्हे मिलेगा 
 जग को लूटने की जीभरकर छूट  
आदर्शवादी  बनने से
 तेरे भाग्य जायेंगे तुझसे रूठ 
बनकर बहुरुपिया तू  भोले- भालों पर टूट 
गिरगिट की तरह रंग बदलो 
और बन जाओ आले दर्जे का धूर्त 
मानव  जन्म को सार्थक कर ले  रे मानव मूर्ख 

गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

कामनी और कंचन को हाथ नहीं लगाता हूँ

भटके हुए प्राणियों को रास्ता दिखाता हूँ 

कामनी और कंचन को हाथ नहीं  लगाता हूँ 

भक्तों को माया से दूर रखने के लिए 

उनकी गाढ़ी कमाई को मुफ्त में उड़ाता हूँ  

उज्जवल भविष्य का इंश्योरेंस लाया हूँ

उज्जवल भविष्य का  इंश्योरेंस लाया हूँ 
किस्मत चमकाने का स्योरेंस लाया हूँ
मुझपर अविश्वास करके पाप का भागी न बन 
टीवी वाला बाबा हूँ,  चुना लगाने का लाइसेंस लाया हूँ  

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

हास्य कविता

चुम्बन करने में लीन हो जाओ
प्यार के व्यापार में तल्लीन हो जाओ
सबसे लंबा चुंबन रिकॉर्ड अपने नाम करके
वेलेनटाइन डे के दिन पंच तत्व में विलिन हो जाओ

रविवार, 29 जनवरी 2012

कुछ लोग फिर मंदी आने की बात कर रहे हैं।



कुछ लोग फिर मंदी आने की बात कर रहे हैं।
यानी माहौल को वेवजह खराब कर रहे है
काल्पानिक अनहोनी से हमें सावधान कर रहे हैं।
देष को वेवजह बदनाम कर रहे हैं।
भय भूख बेरोजगारी का नाम जप रहे हैं।
यानी जानबूझकर वे सावन के अंधे बनने का काम कर रहे हैं।
लोक परलोक की चिंता किए बिना सफेद झूठ बोल रहे हैं
लाखों लोग भूख से मर रहे हैं कहते फिर रहे हैं।
जबकी हकीकत है कि लाखो टन आनाज
आज भी सरकारी गोदामों में सड़ रहा है।
आदमी क्या जानवर भी उसे नहीं पूछ रहा है
किसान कर्ज के चलते नहीं
मुक्ति के लिए जन्नत की सैर कर रहा है
 क्योंकि दुखों से निवृत्ति का
सरकार की ओर से यहीं हरदम ऑफर पा रहा है।

गुरुवार, 19 जनवरी 2012

अमीर -गरीब की खाई को नेताजी देगें पाट

अमीर -गरीब की खाई को नेताजी देगें पाट

देश की जमापूंजी को  वे कर देगें बंदरबांट 

जनता के कल्याण के  लिए कर रहे हैं जातपात

मुस्लिम वर्ग के कल्याण के लिए

 सेकुलरवाद का कर रहे हैं हरदम जाप

उनकी दशा को देखकर बहा रहे हैं आंसू आठ

बटलाहाउस एनकाउंटर को वे कर रहे हैं  हरदम याद

रंग बदलने में तो  वे दे रहे हैं गिरगिट को भी मात

शनिवार, 14 जनवरी 2012

नेताजी का गुण गाता जा प्यारे


बेरोजगारी  का  भय नहीं सताएगा
नेताजी का गुण गाता जा प्यारे   
वे भवसागर पार लगायेंगे
तुम्हें  नोटों की गड्डी पर  सुलायेंगे 
तेरे दुःख दूर करने को घोटाला रचाएंगे
तिहाड़   में दिन बिताएंगे 
पैसा पानी की तरह बहायेंगे
तेरी किस्मत चमकायेंगे  
चुनाव जीतने पर क्षेत्र में झाँकने नहीं आएँगे 
पर  चमचों पर रहमत लुटाएँगे
तेरे माध्यम से वे  शासन को  चलाएंगे
उनकी  चुनावी नैया  पार लगाने को
तू दर- दर भटका जा प्यारे 
यहीं वह वक्त  है
तू बन  जा  नेताजी के आँखों का तारे  

गुरुवार, 12 जनवरी 2012

कुशवाहा का हो रहा गृहप्रवेश है

मौकापरस्ती नहीं
ये पार्टी  विद डिफरेंस है
नया राष्ट्र बनाने का यहीं सेंस है
समय के साथ बदलता पार्टी का वेश है
बाबु सिंह कुशवाहा के प्रति
लोगों में बेवजह रोष है 
कुछ पार्टी नेताओं  में भी  जोश है 
क्योंकि उनको परिणाम का नहीं होश है 
विपक्षी पार्टियों के नैतिकता पर
 दिए प्रवचनों से वे मदहोश  हैं 
 उनमें कुछ आक्रोश  है 
लेकिन उत्तर प्रदेश में प्राप्त करना जनादेश है
इसलिए कुशवाहा का हो रहा गृहप्रवेश है 

शनिवार, 7 जनवरी 2012

संवैधानिक दर्जा देने की गीत गाया जाएगा

नए साल में सरकार नया संकल्प दोहरा रही है।
कि बजट सत्र में लोकपाल बिल लाया जाएगा
संवैधानिक दर्जा देने की गीत गाया जाएगा
दिग्गीराजा से प्रवचन कराया जाएगा
निगमानंदजी की याद दिलाया जाएगा
स्वामीजी को नेपथ्य से लाया जायागा
फिर उसको लटकाया जाएगा
किसी को बली को बकरा बनाया जाएगा
फूट डालो और राजकरो की नीति पर चला जाएगा
नाटक पर नाटक दिखलायागा
अन्ना को कसूरवार ठहराया जाएगा।
लोकतंत्र का मान बढ़ाया जाएगा



महंगाई के हलाहल पी जाएं।

नए साल के स्वागत में
आओ झूमें नाचे गाएं
ठर्रा पीकर सीवर के नाली में गिर जाएं
होष-हवाष गवाएं
महंगाई नजर न आए
लार टपकने न पाए
चाहे कोई कितना पकवान बनाए
चार्वाक के आदर्ष अपनाएं
ऋण लेकर मौज उड़ाएं
नए साल में आओ
षिव षंभू बन जाएं
महंगाई के हलाहल पी जाएं।

आओ नए वर्ड्ढ का स्वागत करें।

आओ नए वर्ड्ढ का स्वागत करें।
महंगाई का आदर करें
संस्कार का निरादर करें
संस्कृति का अनादर करें
जमाने के साथ कदम बढ़ाएं
 दारू पीकर बड़बडाएं
 लोकलाज को पैरों तलें कुचलें
कम कपड़े में जी भरके मचलें
नैतिकता को दरवाजा दिखलाएं
झूठ-फरेब को षिष्टाचार बनाएं

दंतहीन लोकपाल की भेंट।

गठबंधन के दौर में
सिद्धान्तों का चढ़ रहा भेंट
अपने स्वार्थ के खातीर
हर कोई कर रहा अपनी गोटी सेट
मौका हाथ नहीं मिलने वाले
लगा रहे आदर्षवाद की रेट
स्वहित के खातीर अन्ना जा रहे हैं
जंतर- मंतर पर लेट
वरना वे स्वीकारते
दंतहीन लोकपाल की भेंट।

नेताजी का जयमंत्र कल्याणकारक है

बेरोजगारी की बात करना नाहक है।
सरकार की अक्षमता की बात करना संहारक है।
रामलीला मैदान जैसा कष्टदायक है।
निगमानंद जैसा हश्रदायक है
नेताजी का जयमंत्र कल्याणकारक है
उनके गुणों का गुणगान करना फलदायक है।
उनकी परिक्रमा करना भवतारक है।
और विरोध करना मोक्षकारक है।

शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

नेताजी आराधना कर रहे हैं

नेताजी आराधना कर रहे हैं
अपनी जीत के लिए साधना कर रहे हैं
यूपी में त्रिषंकु विधानसभा की कामना कर रहे हैं
हसीन सपनों में कभी कभी गमन कर रहे हैं।
तिहाड़ की वादियों में भ्रमण कर रहे हैं।
एम्स के वीआईपी वार्ड में षयन कर रहे हैं।
किसी आदर्ष स्कैम का चयन कर रहे हैं।
मन हीं मन  फिर कुछ मनन कर रहे हैं
बस सफलता एक कदम दूर है
नैतिकता-वैतिकता की बात सोचना भूल है।
अपनी आत्मा को मारनेवाला हीं षूर-वीर है।
किसी को कुचल कर आगे बढ़ना हीं सफलता की मूल है।
और सब उलूल जुलूल है।
 फिर दूसरा दृष्य सामने आता है
जो नेताजी में आत्मविष्वास जगाता है
 फिर देख रहे हैं कि
वे नोटों की गड्डियों पर सो रहे हैं।
पांच सितारा होटलों में रह रहे हैं
दूर लखनऊ से रह रहे हैं।
कभी दूसरे सपने भी आते हैं
जो उनके मन को भाते हैं।
जैसे कि एकाएक उनका भाव सांतवे आसमान को छू रहा है।
विरोधी पार्टी का नेता उनका चरण छू रहा है
फिर नोटों की गड्डियों से उन्हें तौल रहा है।
लोकत्रंत्र का निरादर करने का अन्ना पर आरोप मढा जा रहा है।
फिर सदन के नेता द्वारा सदन में बताया जा रहा है।
 लोकतंत्र का मान माननीय सदस्यों द्वारा बढ़ाया जा रहा है
अन्ना को भ्रष्ट बताया जा रहा है।
लोकपाल का पलीता लगाया जा रहा है।
स्वामी अग्निवेष को नेपथ्य से सामने लाया जा रहा है।
सदस्यों को नोटों की गड्डियों से तौला जा रहा है।
सदस्यों को लोकपाल कि प्रतियां फाड़ने का बोला जा रहा है।
अपने पक्ष में लाने के लिए उन्हें पकवान खिलाया जा रहा है।
उनका गुण गाया जा रहा है
उन्हें पटाया जा रहा है।
बात नहीं मानने पर
इस दुनिया को छोडकर चले जाने को बोला जा रहा है।
फिर दूसरा दृष्य सामने आता है
 कि बहुमत के पक्ष में वोट करने के लिए
करोड़ो का पैकेज उन्हें दिया जा रहा है।
विपक्ष की नजर न लग जाए
इसलिए दूर कहीं हसीन वादियों में रखा जा रहा है।
 डायरेक्टर के इच्छाअनुसार पार्ट बजाने को कहा जा रहा है।
महामहीम के सामने परेड करने के लिए बोला जा रहा है।

सोमवार, 2 जनवरी 2012

लोक कल्याणकारी सरकार है



लोक कल्याणकारी सरकार है
थोक के भाव  उदार है
मंत्रीजी के रिष्तेदारों के लिए
बेरोजगारी की नहीं मार है
अवसर की भरमार है।
 आरक्षण षब्द बेकार है।
 खुला हर दरबार है।
बाकि लोगों में टैलेंट की दरकार है।
अंग्रेजी नहीं धाराप्रवाह है
पर्सनैल्टी एकदम बेकार है।
बंदा ठोकर खाने को लाचार है।
कोई न पूछनहार है।

रविवार, 1 जनवरी 2012

हास्य कविता

उत्तर प्रदेष में इन दिनों अजब-गजब नजारा दिखाया जा रहा है
कभी भिखारी कहकर जनता का मान बढाया जा रहा है
तो कभी त्वमेव माता चपिता त्वमेव गाया जा रहा है।
पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।
जनता जर्नादन के चरणों में चढ़ाया जा रहा है।
  सदाव्रत खूब लुटाया जा रहा है।
रामराज्य की याद दिलाया जा रहा है।
धर्म एवं जाति का इंजेक्षन लगाया जा रहा है।
जनता को मदहोषी की अवस्था में लाया जा रहा है।
सबको समान रूप से लॉलीपाप दिया जा रहा है।
सामाजिक समरसता लाने के लिए जातिवाद किया जा रहा है।
मुस्लिम आरक्षण प्रावधान किया जा रहा है
 बांटो और राज करो के सिद्धान्त पर चला जा रहा है।
कुर्सी पाने के लिए सारे धर्मकर्म किया जा रहा है।
पुजारियों एवं मुल्लों से जीत का आर्षिवाद लिया जा रहा है।
जनता के दुखदर्द देखकर
नेताजी के आंखों से आंसुओं की धार बही जा रही है।
पांच साल सुध नहीं लेने के लिए पष्चाताप किया जा रहा है
चुनाव जीतने के बाद
क्षतिपूर्ति कर देने का आष्वासन दिया जा रहा है।
मलपूओं एवं मिष्ठानों का भोज खुब दिया जा रहा है।
रैलियों में भाग लेकर षहर घुमने का निमंत्रण दिया जा रहा है।
अपने नाम पर मुहर लगाने के लिए बताया जा रहा है।
पांच साल को नाकाफी बताया जा रहा है।
एकबार और मौका देने के लिए पटाया जा रहा है।
दीन-हीनों को गले से लगाया जा रहा है।
विरोधी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सताया जा रहा है।
चुनावी घोषणपत्र में किस्मत चमकाने के वादेे नेताजी द्वारा जनता से किया जा रहा है
और उसपर यकीन कर मुगेरीलाल के सपने जनता द्वारा बुना जा रहा है।


मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

लोकपाल बकवास है

देष अपना है
सरकार अपनी है
नेता अपने हैं
भ्रष्ट्राचार सपना
कोरी कल्पना है
लोकपाल बकवास है
इसे लागू करना
लोकतंत्र का उपहास है
अज्ञानजनित द्वन्द है
हर कोई स्वच्छन्द है।
नेताओं की मौज है
बेरोजगारों की फौज है
पैसा भगवान है।
बिक रहा ईमान है।
कुतों का मान है
गया-गुजरा इनसान है
फलफूल रहा जयचंद्र हैं।
चैहान के लिए दरवाजे सारे बन्द है
इंडिया खूब षायनींग कर रहा है
चन्द लोगों की तिजोरियां भर रहा है
पर भारत कंगाल है।
जनता लाचार है
देष की आत्मा गावों में बसती है मगर
बस वहां भूख का साम्राज्य है।
बिचौलियों का राज्य है।
पाक के साथ षिष्ट्राचार है।
कसाब बना मेहमान है।

रविवार, 11 दिसंबर 2011

हास्य कविता

भ्रष्ट्राचार आज आचार बन गया है।
नेताओं का षिष्टाचार बन गया है।
दिन-दुनी रात चैगुनी उन्नति का आधार बन गया है।
जाने क्यों अन्ना इसके खिलाफ हल्ला बोल रहे हैं।
जबकि लाखों बेरोजगारों का यह रोजगार बन गया है।